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हाय..यह उल्फतें..... (love)😍😍🌹❤❤
कैसी कश्मकश में यह दिल डूबा हुआ हैं . .......
हाय मेरा जमीर मुझसे क्यूं फितूर हो चला हैं. .....
अब जर्रा जर्रा हमें शायराना महसूस हो रहा हैं ....
इस कातिल दिल मे न जाने क्या तहलका मचा हुआ है.....
खामोशियो का बवंडर क्यूँ इस तरह हमारी तरफ बढ़ रहा है ......
बेखबर हैं हम उनकी दिल्लगी से.......
कोई रूबरू तो कराए...उनसे ...
कही उनका दिल यही तो नही सोच रहा हैं ....?
यह कैसी खलबली ....लमहा लमहा तडपाए....
जालिम दिल हमारा हम पर ही जुल्म ढाए......
वैसे तो महफूज हमारी सोच दिल के कोने मे हैं .......
लेकिन यह हमराज हमारे कुछ ज्यादाही चालाक हैं .!
आखिर किससे बयां करे हाल-ए-दिल ..समझ न आए....
जरा कोई हमराही हमे इल्तेला तो कराए......
उनकी बाते मुहोब्बत भरी कही घायल न कर जाए....
हम तो ठहरे मासूमियत ......
यह कमबख्त दिल..कही दिवाना न हो जाए.....
वाह रे ,उल्फत ....तेरा अदांज भी कुछ अलग सा है...
हम तो अल्फाज ढूंढ रहे थे .....
वे तो नजरो से ही इश्क का एहसास दे गए....
न जाने क्या क्या कह गए.....!
सच मे तभी तो उनपर कुर्बान हैं. ...
यह चाहते बेशुमार.......
पता नही क्या दिल का भरोसा... कब हो जाए प्यार. ....?
तभी तो भाती है हमे यह अनकही चाहते....
समझकर भी उलझे रहे ऐसी है यह ...उल्फते.....
🌹🌹🌹🌹❤❤❤🌹🌹🌹🌹🌹
उल्फत -प्रेम
कश्मकश -
फितूर-फसवं
जमीर-मन
जर्रा -कण न कण
शायराना-शायर सारखा
महसूस-जाणवणे
तहलका -गडबड
खामोशिया-शांतता
बवंडर-वादळ
कातिल-खुनी
बेखबर -बेसावध
दिल्लगी -प्रेम
रूबरू-समोरासमोर
खलबली -गोंधळ
महफूज -सुरक्षित
जुल्म-अन्याय
बयां -व्यक्त
इल्तेला -कळवणे
कमबख्त -मूर्ख
कुर्बान -समर्पित
एहसास -जाणीव
हमराही -दोस्त
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
-@कुणाल विजय ठाकरे
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