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कारगिलमे शहीद जवानों को समर्पित .......
उस दिन.....
..........हो गए हो वह शहीद...देश के लिए..
कई दिल...जान हथेली पर रखकर लडते रहे. ....
दुश्मन को मार गिराने कि जो ठान ली थी... ..
बही थी देश प्रेम की नदियां ......
कारगिल कि उस जमीन पर....
हवाएं भी पल भर के लिए ठहरी थी.....
जुनून भरी वह जंग आजादी कि ..देखकर धरती भी कांप गई थी .........
और...शान से जीत का तिरंगा ..लहराया था.....
मौत का कफन लेकर फौजी तो हमेशा लडते हैं ....
उस दिन न जाने क्या जोश..क्या वीरता उनकी रगो मे दौडी थी....
चले गए वह .थे.....हमेशा के लिए ....
कई दिलों मे जुनून जगाकर....
सोचता हूं ....क्या कहती होंगी उनकी आंखे...
वह ना थकनेवाले उनके कदम.....
क्या सोचते होंगे .....?
नही भूला पाएगा कोई....कभीभी...
उनका बलिदान .....
वह जमीन भी....उनकी आहटे समेटे हुई हैं ....और होगी हमेशा.....
शुक्रगुजार रहेंगे हम सब उनके .........हमेशा.
.बार बार याद आते रहेंगे.....उनके जज्बे......
वह देशप्रेम कि मिसाले....
वह आखिरी दम तक लडती हुई सांसे ......
और वह पल पल हिफाजत के लिए धडकने वाले दिल.......
याद आते रहेंगे. ...
हमेशा हमें जिंदगी कि एहमियत बताते रहेंगे ......
उन सभी देश के रखवालो को दिसले सलाम. .........
-@कुणाल विजय ठाकरे.

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